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क्या नारद जी के श्राप के कारण हुआ श्री राम का जन्म ?

श्री हरि हर कल्प में अपनी लीलायें रचते रहते है। रामचरितमानस के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शंकर से श्री राम के जन्म के बारें में पूछा। शंकर जी ने कहा कि प्रभु श्री हरि के जन्म के कई कारण है। सब हरि की इच्छा से ही होता है। शंकर जी ने कहा कि श्री राम के जन्म एक कारण नारद जी का श्राप है।
श्री हरि हर कल्प में अपनी लीलायें रचते रहते है। रामचरितमानस के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शंकर से श्री राम के जन्म के बारें में पूछा। शंकर जी ने कहा कि प्रभु श्री हरि के जन्म के कई कारण है। सब हरि की इच्छा से ही होता है। शंकर जी ने कहा कि श्री राम के जन्म एक कारण नारद जी का श्राप है।
माता पार्वती के आग्रह पर भगवन शिवशंकर ने कथा बताई।
अपनी माया से श्री हरि ने एक बहुत सुंदर राज्य बनाया और जिसकी राजकुमारी बहुत सुंदर थी। उस राजकुमारी का स्वयंवर रचाया जा रहा था। माया से मोहित हुए नारद जी राजकुमारी की सुंदरता को देखकर वैराग्य भूल गए। उनके मन में उस राजकुमारी को पाने की इच्छा जाग्रत हो गई। उन्होंने विचार किया कि मै एक सुंदररूप धारण कर स्वयंवर में जाऊ ताकि राजकुमारी मुझे ही वरें।
ऐसा विचार कर वो श्री हरि के पास गयें और उनसे सुंदररूप देने की प्रार्थना की। श्री हरि तो पहले ही सब जानते थे उन्होंने मुनि का अहंकार दूर करने के लिए उन्हें बंदर तो रूप दिया। नारद जी को यह पता नहीं था और वे अपने आप को बहुत सुंदर समझ कर स्वयंवर में गए।
स्वयंवर में सब उन्हें देख कर मुस्कुराने लगे। माया से वशीभूत मुनि को उनकी हँसी अपनी प्रसन्नसा लगी। राजकुमारी ने उन्हें एक बार देख कर दुबारा देखा भी नहीं और अन्य राजकुमार को वरा। जब नारद जी ने पानी में अपना रूप देखा तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। बहुत गुस्से में वो श्री हरि के पास गए और उन्हें श्राप दिया कि
“आपने मेरा रूप बंदर का सा बना दिया था, इससे बंदर ही तुम्हारी सहायता करेंगे। और मैं जिस स्त्री को चाहता था, उससे मेरा वियोग कराया है इससे तुम भी स्त्री के वियोग में दुःखी होंगे”
श्री हरि ने इस श्राप को स्वीकार किया। इस तरह नारद जी के श्राप को पूर्ण करने के लिए श्री राम के रूप में जन्म लिया और स्त्री वियोग सहना पड़ा।
श्री हरि के अवतार का बस यही ही एक कारण नहीं है बल्कि अनेकों कारण हैं और उनमें से भी कई ऐसे कारण हो सकते हैं, जिन्हें कोई जान ही नहीं सका।
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