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ऐसा शिवलिंग जिसमें बकरें की गंध आती है - अजगंधेश्वर महादेव

ऐसा शिवलिंग जिसमें बकरें की गंध आती है - अजगंधेश्वर महादेव

इस शिवलिंग को प्रात: हाथों से रगड़ कर सूंघे तो आपको हाथों से बकरें की गंध सी आती हुई प्रतीत होती है।
अजगंधेश्वर महादेव अजमेर की अजयसर गाँव की पहाडियों में स्थित अतिप्राचीन मंदिर है। यह अजमेर से 10 किलोमीटर दूर फायसागर की ओर नाग पर्वत पर स्थित है। इस प्राचीन मंदिर का निर्माण अजमेर के संस्थापक शिव भक्त राजा अजयपाल सिंह ने कराया था। पद्मपुराण के सृष्टि खंड के अनुसार भगवन श्री राम ने पुष्कर यात्रा के दौरान अजगंधेश्वर महादेव के दर्शन कर भगवन शिव की स्तुति की थी।
शास्त्रों में अतिप्राचीन अजगंधेश्वर महादेव की कथा इस प्रकार बताई गई है।
प्राचीनकाल में वाष्कलि नामक एक दैत्य हुआ। उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया और देवो और मनुष्यों से अवध्य होने का वरदान प्राप्त किया। वरदान मिलने पर दैत्य अभिमानी हो गया। वह देवों और मनुष्यों को परेशान करने लगा और अमरावती पर अधिकार कर लिया। चारो तरफ हाहाकार मचने लगा। तब इन्द्रादि देवता भगवन शिव की शरण में गए और वाष्कलि दैत्य के संहार की प्रार्थना की।

देवो के देव भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार कर दैत्य के वध का वचन दिया।

कार्तिक चतुर्थी के दिन भगवन शिव ने एक विशालकाय बकरें (अज) का रूप धारण कर वाष्कलि के सामने आये। दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। और अंत में भगवन शिव ने अपने सींगो से उठाकर धरती पर पटकर वाष्कलि का वध किया। इस युद्ध में जहाँ जहाँ भगवन शिव के पैर पड़े, वहाँ वहाँ बड़े बड़े चिन्ह बन गए जो आज भी स्थित है। दैत्य का वध करने पर सभी दैवो ने भगवन की स्तुति की व पुष्करारण्य क्षेत्र में निवास करनें इच्छा जताई उसी समय दैवो की इच्छा पूर्ण करने के लिए वहाँ धरती में से एक शिवलिंग निकला जो अजगंधेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
कभी आपकों अजमेर यात्रा अवसर मिलें तो अजगंधेश्वर महादेव के मंदिर में जरुर जाना। यह एक सिद्ध स्थान है। यदि आप श्रध्दा और विश्वास से मन्नत माँगते है तो अवश्य पूरी होगी।
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