आज के बोल
बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच ॥
राम काज में सहयोग के लिए कैकेयी ने स्वीकारा कलंक का टीका

 

महाराज दशरथ ने कैकेय नरेश की राजकुमारी कैकेयी से विवाह किया। यह महाराज का अंतिम विवाह था। महारानी कैकेयी अत्यंत पति परायणा थीं। महाराज उनसे सर्वाधिक प्रेम करते थे।

देवताओं और...

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पर्स में रखें ये अभिमंत्रित पत्ता

हनुमान अष्टमी को सुबह स्नान करने के बाद बड़ के पेड़ का एक पत्ता तोड़ें और इसे साफ स्वच्छ पानी से धो लें। अब इस पत्ते को कुछ देर हनुमानजी की प्रतिमा के सामने रखें और इसके बाद इस पर केसर से श्रीराम ल...

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इस उपाय से दूर होगा हर दोष

हनुमान अष्टमी को घर में पारद निर्मित हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित करें। पारद को रसराज कहा जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, पारद से बनी हनुमान प्रतिमा की पूजा करने से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। पारद...

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मिलेगी श्रीराम व हनुमानजी की कृपा

शाम को  समीप स्थित किसी ऐसे मंदिर जाएं, जहां भगवान श्रीराम व हनुमानजी दोनों की ही प्रतिमा हो। वहां जाकर श्रीराम व हनुमानजी की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी के दीपक जलाएं। इसके बाद वहीं भगवान श्रीर...

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ऐसे चढ़ाएं हनुमानजी को चोला

हनुमानजी को चोला चढ़ाने से पहले स्वयं स्नान कर शुद्ध हो जाएं और साफ वस्त्र धारण करें। सिर्फ लाल रंग की धोती पहने तो और भी अच्छा रहेगा। चोला चढ़ाने के लिए चमेली के तेल का उपयोग करें। साथ ही, चोला चढ...

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AtulitBaldhama

"रामदूत अतुलितबलधामा, अंजनीपुत्र पवनसुत नामा", ये पंक्तियाँ है तुलसीदास जी की लिखी गई बहुत ही प्रभावी कृति हनुमान चालीसा की।
इसमें हनुमान जी को अतुलितबलधामा कहा गया, अतुलितबल धामा मतलब अद्वितीय, बेजोड़, अनुपम, अपरिमित,अतुल्य,अपार परम शक्तिशाली जिसके समान पूरा विश्व में कोई ना हो। हनुमान जी की शक्ति का वर्णन नहीं किया जा सकता। महासिंधु को लांघना, लंका दहन, संजीवनी के लिए द्रोंणगिरी को उठाना, रावण को मुक्का मार कर मूर्छित करना आदि ऐसे बहुत से प्रसंग है जो हनुमान जी को अतुलितबलधामा प्रमाणित करते है। हनुमान जी अतिशक्तिसम्पन्न तथा परम पराक्रमी होने के साथ-साथ अत्यंत बुद्धिमान, शास्त्रों के ज्ञाता, कुशल राजनीतिज्ञ, सरलता की मूर्ति, समस्त अमंगलो का नाश करने वाले तथा अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता है।
हनुमान जी को चिरंजीवी भी कहा गया है। माता सीता ने हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान दिया था।
अश्वथामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषण:।
कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन: ।।

अर्थात अश्वथामा, राजा बलि, महर्षि व्यास, हनुमान जी, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सातों अमर है।
यदि आप संकटों से मुक्ति, संकटों में अडिगता, भय से मुक्ति, चिन्ताओ से मुक्ति, समस्याओं का समाधान चाहते है तो आपको हनुमान जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।

"Ramdoot Atulitbaldhama , Anjaniputra Pawansut nama", These lines are taken from Hanuman Chalisa which is most effective creation of TulsiDas ji.
In these lines, Hanuman ji is called AtulitBaldhama. Atulit bal dhama means unique, immense, incredible, ultimate powerful. We can't explain power of Hanuman ji in words. Crossing the MahaSindhu, Put lanka in fire, lifted DronaGiri Mountain for Sanjivani, fainting rawan by powerful punch etc. are lot of context which proved Hanuman ji as a Atulit Baldhama. Hanuman ji is not only omnipotent and sovereign mighty but also very inteligent, Knower of Shastra, skilled politician, idol of simplicity, remover of Ominous incidents and blessing of Ashtha Siddhi Nav Niddhi.
Hanuman ji is also called immortal. Mata Sita blessed him for immortality.
Ashwathama balirvyaso hanumanshchay vibhishanh ।
kriph parshuramshchay saptaite chirjivinah ।।

: Ashwathama, King bali, maharshi vyas, Hanuman ji, vibhishan,kripa charya and parshuram These seven are immortal.
If you want to be free from crisis, determinate in problems, being fearless, tension free and finding solution of problems, you must worship of Hanuman ji.


 

 

 

 

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